DRDO की ‘प्रलय’ मिसाइल: एक ही लॉन्चर से दो मिसाइलों का सफल परीक्षण – पूरी जानकारी
भारत की रक्षा क्षमताओं में निरंतर मजबूती देखने को मिल रही है और इसी क्रम में 31 दिसंबर 2025 को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई, जब Defence Research and Development Organisation (DRDO) ने एक ही मोबाइल लॉन्चर से दो ‘Pralay missile’ मिसाइलों का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। यह परीक्षण तकनीकी दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामरिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से भी बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे भारत की त्वरित प्रहार और बहु-लक्ष्य भेदन क्षमता को मजबूती मिलती है।
1. प्रलय मिसाइल क्या है?
प्रलय मिसाइल भारत द्वारा विकसित एक स्वदेशी, ठोस ईंधन आधारित, सतह-से-सतह (Surface-to-Surface) मार करने वाली क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल है। इसे मुख्य रूप से पारंपरिक युद्ध (Conventional Warfare) के लिए डिजाइन किया गया है, ताकि भारत बिना परमाणु हथियारों का प्रयोग किए भी दुश्मन को प्रभावी जवाब दे सके।
“Quasi-Ballistic” शब्द का अर्थ यह है कि यह मिसाइल पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों की तरह अत्यधिक ऊँचाई तक नहीं जाती, बल्कि अपेक्षाकृत कम ऊँचाई पर उड़ते हुए रास्ते में दिशा बदलने की क्षमता रखती है। यही विशेषता इसे आधुनिक एंटी-मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए चुनौतीपूर्ण बनाती है।
2. प्रलय मिसाइल किस श्रेणी की मिसाइल है?
प्रलय मिसाइल को निम्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है:
- Surface-to-Surface Missile (SSM)
- Short-Range / Tactical Missile
- Quasi-Ballistic Missile
- Conventional (Non-Nuclear) Missile
यह मिसाइल अग्नि श्रृंखला की तरह परमाणु हथियार ले जाने के लिए नहीं बनाई गई है, बल्कि इसका उद्देश्य सीमित और सटीक पारंपरिक हमले करना है।
3. प्रलय मिसाइल की तकनीकी विशेषताएँ (Technical Features)
🔹 रेंज (Range)
प्रलय मिसाइल की मारक क्षमता लगभग 150 किलोमीटर से 500 किलोमीटर तक मानी जाती है। यह रेंज इसे सीमावर्ती इलाकों में दुश्मन के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के लिए उपयुक्त बनाती है।
🔹 ईंधन प्रणाली
यह Solid Propellant (ठोस ईंधन) पर आधारित है, जिससे:
- मिसाइल को कम समय में लॉन्च किया जा सकता है
- रखरखाव आसान होता है
- विश्वसनीयता बढ़ती है
🔹 सटीकता (Accuracy)
प्रलय मिसाइल आधुनिक Guidance और Navigation System से लैस है, जो इसे उच्च सटीकता प्रदान करता है। इसका उद्देश्य बड़े क्षेत्र को नहीं, बल्कि चुने हुए High-Value Targets को सटीक रूप से नष्ट करना है।
🔹 मैन्युवर करने की क्षमता
उड़ान के दौरान दिशा बदलने की क्षमता प्रलय को दुश्मन के रडार और मिसाइल डिफेंस सिस्टम से बचने में मदद करती है।
4. एक ही लॉन्चर से दो प्रलय मिसाइलों का परीक्षण क्यों खास है?
हालिया परीक्षण में DRDO ने एक ही मोबाइल लॉन्चर से तेज़ अंतराल में दो मिसाइलों को लॉन्च किया। इसे Salvo Launch Capability कहा जाता है।
🔥 इसका महत्व:
- दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम पर एक साथ दबाव
- एक से अधिक लक्ष्यों पर एक साथ हमला
- युद्ध में तेज़ और निर्णायक बढ़त
आधुनिक युद्ध में ऐसी क्षमता को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इससे दुश्मन की रक्षा प्रणाली “ओवरलोड” हो सकती है।
5. प्रलय मिसाइल का उपयोग किन उद्देश्यों के लिए किया जाता है?
प्रलय मिसाइल का मुख्य उपयोग निम्नलिखित लक्ष्यों के विरुद्ध किया जा सकता है:
- दुश्मन के एयरबेस
- कमांड और कंट्रोल सेंटर
- रडार और संचार प्रणाली
- लॉजिस्टिक और सप्लाई हब
यह मिसाइल खास तौर पर सीमित क्षेत्रीय संघर्ष (Limited War Scenario) के लिए बनाई गई है।
6. प्रलय मिसाइल कहाँ-कहाँ तैनात है? (Deployment)
प्रलय मिसाइल को भारतीय थलसेना (Indian Army) में शामिल किया जा चुका है। इसकी तैनाती मुख्य रूप से:
- उत्तरी सीमाओं
- पश्चिमी सीमाओं
पर की गई है, जहाँ तेज़ प्रतिक्रिया और सटीक हमले की आवश्यकता होती है।
🚚 Mobile Launcher आधारित प्रणाली
प्रलय मिसाइल को Road-Mobile Launcher से दागा जाता है, जिससे:
- इसे आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है
- छिपाकर तैनात किया जा सकता है
- दुश्मन के लिए इसका पता लगाना कठिन हो जाता है
7. क्या प्रलय मिसाइल का वास्तविक युद्ध में उपयोग हुआ है?
अब तक प्रलय मिसाइल का किसी वास्तविक युद्ध में उपयोग नहीं हुआ है।
हालाँकि, इसके कई सफल परीक्षण और User Evaluation Trials यह सिद्ध करते हैं कि यह मिसाइल पूरी तरह Operationally Ready है।
8. प्रलय मिसाइल क्यों खास मानी जाती है? (Key Advantages)
- पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित
- तेज़ प्रतिक्रिया देने की क्षमता
- उच्च सटीकता और विश्वसनीयता
- परमाणु हथियारों के बिना भी प्रभावी deterrence
- आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं के अनुरूप डिजाइन
9. भारत की रक्षा रणनीति में प्रलय मिसाइल की भूमिका
प्रलय मिसाइल भारत की Conventional Deterrence Strategy को मजबूत बनाती है। यह भारत को यह विकल्प देती है कि वह गंभीर स्थिति में परमाणु सीमा पार किए बिना भी दुश्मन को सख्त जवाब दे सके। यही कारण है कि इसे भारत की अगली पीढ़ी की सामरिक मिसाइलों में गिना जाता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
एक ही लॉन्चर से दो प्रलय मिसाइलों का सफल परीक्षण यह दर्शाता है कि भारत न केवल मिसाइल तकनीक में आत्मनिर्भर हो रहा है, बल्कि आधुनिक युद्ध की रणनीतियों को भी सफलतापूर्वक अपनाने में सक्षम है।
प्रलय मिसाइल तेज़, सटीक, घातक और पूरी तरह स्वदेशी है, जो आने वाले समय में भारतीय सेना की ताकत को और बढ़ाएगी।
महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर (Q&A)
Q1. प्रलय मिसाइल को Quasi-Ballistic क्यों कहा जाता है?
उत्तर: क्योंकि यह पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइल की तरह बहुत ऊँचाई तक नहीं जाती और उड़ान के दौरान दिशा बदलने की क्षमता रखती है, जिससे यह दुश्मन के रडार और मिसाइल डिफेंस सिस्टम से बच सकती है।
Q2. Salvo Launch Capability का क्या महत्व है?
उत्तर: इससे एक ही लॉन्चर से तेज़ी से कई मिसाइलें दागी जा सकती हैं, जिससे दुश्मन की रक्षा प्रणाली पर एक साथ दबाव बनता है और कई लक्ष्यों पर हमला संभव होता है।
Q3. प्रलय मिसाइल का मुख्य उपयोग किस प्रकार के युद्ध में होता है?
उत्तर: इसका उपयोग मुख्य रूप से पारंपरिक और सीमित क्षेत्रीय युद्ध में किया जाता है, जहाँ सटीक और तेज़ हमले की आवश्यकता होती है।
Q4. प्रलय मिसाइल भारत की रक्षा नीति में क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: क्योंकि यह भारत को बिना परमाणु हथियारों का प्रयोग किए प्रभावी जवाबी कार्रवाई की क्षमता देती है और Conventional Deterrence को मजबूत बनाती है।