लोहड़ी पर्व में जलता अलाव, भांगड़ा करते लोग और पारंपरिक मिठाइयाँ – पंजाब का प्रसिद्ध फसल त्योहार

लोहड़ी पर्व 2026: परंपरा, इतिहास, महत्व और परीक्षा उपयोगिता | Current Affairs

लोहड़ी पर्व : परंपरा, संस्कृति और समकालीन महत्व

📅 दिनांक | स्थान | इवेंट

दिनांक: 13 जनवरी (प्रति वर्ष)
स्थान: मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली एवं उत्तर भारत के अन्य क्षेत्र
इवेंट: लोहड़ी – पारंपरिक फसल एवं ऋतु परिवर्तन पर्व


🔷 क्या हुआ?

लोहड़ी उत्तर भारत का एक प्रमुख पारंपरिक पर्व है, जिसे हर वर्ष 13 जनवरी की रात बड़े उत्साह और सामुदायिक सहभागिता के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार सर्द ऋतु के चरम समय और रबी फसलों के आगमन का प्रतीक माना जाता है। लोहड़ी की सबसे विशिष्ट पहचान है – अलाव (आग) जलाकर उसके चारों ओर सामूहिक गीत, नृत्य और पारंपरिक खाद्य पदार्थों का अर्पण। यह पर्व प्रकृति, सूर्य, कृषि और सामूहिक जीवन मूल्यों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम है।


🔶 पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक संदर्भ

लोहड़ी का इतिहास कृषि आधारित सभ्यता से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह पर्व उस समय मनाया जाता है जब सर्दियों की लंबी रातें धीरे-धीरे छोटी होने लगती हैं और सूर्य की उत्तरायण यात्रा आरंभ होती है। कृषि समाज में यह समय नई उम्मीदों, बेहतर फसल और आर्थिक स्थिरता का संकेत देता है।

इतिहास और लोक परंपराओं में लोहड़ी को ग्रामीण जीवन से जोड़ा गया है, जहाँ लोग सामूहिक रूप से प्रकृति की शक्तियों को धन्यवाद देते थे। यह पर्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।


🔶 दुल्ला भट्टी की लोककथा

लोहड़ी पर्व का एक प्रसिद्ध लोकनायक दुल्ला भट्टी है, जिन्हें पंजाब का रॉबिन हुड भी कहा जाता है। लोककथाओं के अनुसार उन्होंने समाज में अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध आवाज उठाई तथा जरूरतमंदों की सहायता की।
लोहड़ी के पारंपरिक गीतों में “सुंदरी-मुंदरी” की कथा गाई जाती है, जो दुल्ला भट्टी द्वारा कन्याओं की रक्षा और विवाह कराने से जुड़ी हुई है। यह लोककथा लोहड़ी को नैतिक मूल्यों, सामाजिक न्याय और सामुदायिक भावना से जोड़ती है।


🔷 लोहड़ी से जुड़े प्रमुख रीति-रिवाज

🔥 1. अलाव प्रज्वलन

लोहड़ी का केंद्र बिंदु अलाव होता है। लोग लकड़ी, उपले और कृषि अवशेषों से आग जलाते हैं। अलाव के चारों ओर परिक्रमा कर उसमें तिल, गुड़, मूंगफली, मक्का और पॉपकॉर्न अर्पित किए जाते हैं।

🍬 2. पारंपरिक खाद्य पदार्थ

  • गजक
  • रेवड़ी
  • मूंगफली
  • तिल और गुड़ से बने व्यंजन
  • मक्के की रोटी और सरसों का साग

ये सभी खाद्य पदार्थ सर्दी में ऊर्जा और पोषण का प्रतीक हैं।

💃 3. लोकगीत और नृत्य

ढोल की थाप पर भांगड़ा और गिद्दा किए जाते हैं। बच्चे और युवा समूह बनाकर पारंपरिक लोहड़ी गीत गाते हैं और घर-घर जाकर लोहड़ी मांगते हैं।

👶 4. विशेष पारिवारिक आयोजन

जिन घरों में नवजात शिशु हुआ हो या हाल ही में विवाह हुआ हो, वहाँ लोहड़ी विशेष रूप से धूमधाम से मनाई जाती है।


🔷 क्षेत्रीय और सांस्कृतिक विविधता

हालाँकि लोहड़ी मुख्य रूप से पंजाब का पर्व है, लेकिन इसका प्रभाव हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और जम्मू क्षेत्र में भी देखने को मिलता है।
सिंधी समुदाय में इसी प्रकार का पर्व “लाल लोई” के नाम से मनाया जाता है।
समय के साथ लोहड़ी ने क्षेत्रीय सीमाओं को पार कर एक सांस्कृतिक उत्सव का रूप ले लिया है।


🔶 आधुनिक समय में लोहड़ी

शहरीकरण और आधुनिक जीवनशैली ने लोहड़ी के स्वरूप में कुछ परिवर्तन किए हैं। आज लोहड़ी केवल ग्रामीण खेतों तक सीमित नहीं, बल्कि:

  • हाउसिंग सोसायटी
  • कॉलेज कैंपस
  • कार्यालय और कॉर्पोरेट इवेंट
  • थीम आधारित पार्टियाँ

के रूप में भी मनाई जाती है। सोशल मीडिया के माध्यम से लोहड़ी वैश्विक स्तर पर सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बन गई है।


🔷 आर्थिक प्रभाव

लोहड़ी का स्थानीय अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है:

  • तिल, गुड़, मूंगफली और मिठाइयों की मांग बढ़ती है
  • लोक कलाकारों, ढोल वादकों और कारीगरों को रोजगार मिलता है
  • पारंपरिक परिधान और सजावट से जुड़े व्यवसाय सक्रिय होते हैं
  • सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलता है

🔶 चुनौतियाँ और अवसर

⚠️ चुनौतियाँ

  • शहरीकरण के कारण पारंपरिक ग्रामीण स्वरूप का क्षय
  • पर्यावरणीय चिंता – अत्यधिक अलाव और प्रदूषण
  • त्योहार का व्यावसायीकरण

🌱 अवसर

  • पर्यावरण-अनुकूल लोहड़ी (सीमित अलाव, सामूहिक आयोजन)
  • लोक संस्कृति और हस्तशिल्प को बढ़ावा
  • सांस्कृतिक पर्यटन और युवा सहभागिता

📝 परीक्षा उपयोगिता (Exam-Oriented Takeaways)

  • लोहड़ी एक पारंपरिक फसल पर्व है
  • यह 13 जनवरी को मनाया जाता है
  • मुख्य रूप से पंजाब से संबंधित
  • दुल्ला भट्टी से जुड़ी लोककथाएँ महत्वपूर्ण
  • यह पर्व मकर संक्रांति से एक दिन पूर्व मनाया जाता है

(UPSC | State PCS | SSC | Banking | Railway Exams के लिए उपयोगी)


🔚 निष्कर्ष

लोहड़ी केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भारतीय कृषि संस्कृति, सामूहिक जीवन और लोक परंपराओं का जीवंत प्रतीक है। यह पर्व हमें प्रकृति के साथ संतुलन, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का संदेश देता है। आधुनिक समय में आवश्यकता है कि लोहड़ी को पर्यावरण-अनुकूल और सांस्कृतिक रूप से सशक्त बनाकर आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाया जाए।


❓ FAQs

प्रश्न 1: लोहड़ी किस राज्य का प्रमुख पर्व है?
उत्तर: पंजाब

प्रश्न 2: लोहड़ी किस तिथि को मनाई जाती है?
उत्तर: 13 जनवरी

प्रश्न 3: लोहड़ी का मुख्य प्रतीक क्या है?
उत्तर: अलाव (Bonfire)

प्रश्न 4: लोहड़ी किस फसल से संबंधित है?
उत्तर: रबी फसल

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *