उत्तर प्रदेश मतदाता सूची में 2.89 करोड़ नाम हटाए गए | Current Affairs जनवरी 2026

📊 उत्तर प्रदेश मतदाता सूची में बड़ी कटौती: लगभग 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए


📍 स्थान

उत्तर प्रदेश

📅 तिथि

06 जनवरी 2026


📰 प्रस्तावना (Introduction)

लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे मजबूत नींव मतदाता सूची (Electoral Roll) होती है। भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में मतदाता सूची का नियमित और शुद्ध होना अत्यंत आवश्यक है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश, जो देश का सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य है, वहाँ विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के बाद एक बड़ा प्रशासनिक कदम सामने आया है।

निर्वाचन आयोग द्वारा जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में लगभग 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। यह संख्या अपने आप में ऐतिहासिक है और इसने राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया है।


🏛️ निर्णय किसने लिया?

यह कार्रवाई निर्वाचन आयोग (Election Commission of India – ECI) के निर्देश पर की गई है।

राज्य स्तर पर यह प्रक्रिया मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO), उत्तर प्रदेश के कार्यालय द्वारा लागू की गई, जिसमें जिला निर्वाचन अधिकारियों, BLO (Booth Level Officers) और स्थानीय प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका रही।


📌 क्या है Special Intensive Revision (SIR)?

Special Intensive Revision (SIR) मतदाता सूची की वह प्रक्रिया है, जिसमें घर-घर जाकर मतदाताओं का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया जाता है।

🔍 SIR का उद्देश्य

  • मृत मतदाताओं के नाम हटाना
  • स्थानांतरित (Migrated) मतदाताओं की पहचान
  • डुप्लिकेट / फर्जी नामों को हटाना
  • नए योग्य मतदाताओं को जोड़ना
  • मतदाता सूची को अधिक शुद्ध, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना

📊 कितने नाम हटाए गए? (Key Data)

विवरणसंख्या
हटाए गए कुल मतदाता≈ 2.89 करोड़
कारणमृत्यु, स्थानांतरण, डुप्लिकेट, गैर-मौजूद
सूची का प्रकारड्राफ्ट मतदाता सूची
प्रक्रियाSpecial Intensive Revision (SIR)
अगला चरणदावा-आपत्ति (Claims & Objections)

📌 यह कटौती ड्राफ्ट लिस्ट में की गई है, यानी अंतिम सूची से पहले नागरिकों को सुधार का अवसर दिया गया है।


🧾 नाम हटाने के प्रमुख कारण

निर्वाचन आयोग के अनुसार, मतदाता सूची से नाम हटाने के पीछे निम्न कारण रहे:

1️⃣ मृत मतदाता

  • बड़ी संख्या में ऐसे नाम पाए गए जिनकी मृत्यु हो चुकी थी
  • कई मामलों में परिवार द्वारा मृत्यु की सूचना नहीं दी गई थी

2️⃣ स्थानांतरण (Migration)

  • एक विधानसभा/जिले से दूसरे स्थान पर स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाता
  • नए स्थान पर नाम जुड़ने के बाद पुराने स्थान से नाम हटाया गया

3️⃣ डुप्लिकेट प्रविष्टियाँ

  • एक ही व्यक्ति के नाम दो या अधिक स्थानों पर दर्ज
  • आधार/EPIC सत्यापन के दौरान पकड़े गए मामले

4️⃣ फर्जी या अप्रमाणित नाम

  • BLO सत्यापन में व्यक्ति का अस्तित्व नहीं पाया गया
  • पते पर कोई मतदाता नहीं मिला

🏙️ उत्तर प्रदेश का विशेष महत्व

उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा निर्वाचन राज्य है:

  • 📌 सबसे अधिक लोकसभा सीटें – 80
  • 📌 सबसे अधिक मतदाता
  • 📌 राष्ट्रीय राजनीति में निर्णायक भूमिका

इसलिए UP की मतदाता सूची में किया गया कोई भी बदलाव राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव डालता है।


⚖️ राजनीतिक और संवैधानिक महत्व

मतदाता सूची का शुद्धिकरण लोकतंत्र के लिए आवश्यक है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में नाम हटना राजनीतिक दृष्टि से भी संवेदनशील विषय बन जाता है।

✔️ सकारात्मक पक्ष

  • निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव
  • फर्जी मतदान की संभावना कम
  • “One Person – One Vote” सिद्धांत मजबूत

⚠️ चिंताएँ

  • वास्तविक मतदाता का नाम गलती से हटने का जोखिम
  • जागरूकता की कमी से गरीब/ग्रामीण मतदाताओं को नुकसान
  • राजनीतिक विवाद और आरोप-प्रत्यारोप

📝 दावा और आपत्ति (Claims & Objections) प्रक्रिया

निर्वाचन आयोग ने नागरिकों को राहत देते हुए दावा और आपत्ति दर्ज करने का अवसर दिया है।

📅 महत्वपूर्ण तिथियाँ

  • 🗓️ दावा/आपत्ति की अंतिम तिथि: 06 फरवरी 2026
  • 🗓️ अंतिम मतदाता सूची जारी: 06 मार्च 2026

🧑‍💻 कैसे सुधार कर सकते हैं?

  • ऑनलाइन: NVSP पोर्टल
  • ऑफलाइन: BLO / निर्वाचन कार्यालय
  • फॉर्म: 6, 7, 8 (आवश्यकतानुसार)

🌐 सामाजिक प्रभाव

इतनी बड़ी संख्या में नाम हटने का प्रभाव समाज के कई वर्गों पर पड़ेगा:

  • 🧓 वृद्ध और अशिक्षित मतदाता
  • 🧑‍🌾 ग्रामीण आबादी
  • 🏙️ शहरी प्रवासी मजदूर
  • 👩 महिलाएँ (जिनके दस्तावेज अधूरे हो सकते हैं)

इसलिए जागरूकता अभियान चलाना प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी बन जाती है।


🧠 परीक्षा के लिए उपयोगिता (Exam Relevance)

🎯 महत्वपूर्ण परीक्षाएँ

  • UPSC (Prelims + Mains)
  • State PCS (UPPCS विशेष)
  • SSC (CGL, CHSL)
  • Banking & Teaching Exams

❓ संभावित प्रश्न

  1. उत्तर प्रदेश में कितने मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से हटाए गए?
  2. SIR (Special Intensive Revision) क्या है?
  3. मतदाता सूची का शुद्धिकरण क्यों आवश्यक है?
  4. अंतिम मतदाता सूची कब जारी होगी?

🔑 One-Liner (Exam Ready)

👉 जनवरी 2026 में उत्तर प्रदेश में SIR के तहत जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची से लगभग 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए।


📚 स्रोत (Sources)

  • निर्वाचन आयोग
  • प्रमुख समाचार पत्र (Aaj Tak, NDTV, Amar Ujala)
  • राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय

🔚 निष्कर्ष (Conclusion)

उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची से 2.89 करोड़ नामों की कटौती भारत के चुनावी इतिहास में एक बड़ा प्रशासनिक कदम है। इसका उद्देश्य लोकतंत्र को कमजोर करना नहीं, बल्कि उसे और अधिक शुद्ध, निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाना है।

हालाँकि, इस प्रक्रिया की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कोई भी पात्र मतदाता अपने मताधिकार से वंचित न हो। इसके लिए प्रशासन, राजनीतिक दलों और नागरिकों — तीनों की समान भागीदारी आवश्यक है।

यदि सही ढंग से लागू किया गया, तो यह कदम भारत के चुनावी तंत्र को वैश्विक स्तर पर और मजबूत उदाहरण बना सकता है।

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