🇮🇳 भारत का आर्थिक रिकॉर्ड: जापान को पीछे छोड़कर विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था
भूमिका
वर्ष 2025 भारत के आर्थिक इतिहास में एक निर्णायक मोड़ के रूप में दर्ज किया जा रहा है। हालिया सरकारी और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक आकलनों के अनुसार, भारत ने जापान को पीछे छोड़ते हुए विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का स्थान हासिल कर लिया है। भारत का नाममात्र (Nominal) सकल घरेलू उत्पाद अब लगभग 4.18 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच चुका है।
यह उपलब्धि केवल रैंकिंग में बदलाव नहीं है, बल्कि यह भारत की आर्थिक संरचना, नीति-निर्णयों और दीर्घकालिक विकास क्षमता को दर्शाती है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति
अब तक विश्व की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में अमेरिका, चीन, जर्मनी और जापान का प्रभुत्व रहा है। भारत का चौथे स्थान पर पहुँचना इस बात का संकेत है कि वह अब केवल “विकासशील” नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित हो रहा है।
इस उपलब्धि के साथ भारत की भूमिका अंतरराष्ट्रीय मंचों जैसे G20, IMF और विश्व बैंक में और अधिक प्रभावशाली हो गई है। वैश्विक निवेशकों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए भारत अब एक प्रमुख रणनीतिक बाजार बन चुका है।
नाममात्र GDP क्या होता है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
नाममात्र GDP वह आर्थिक माप है जिसमें किसी देश की कुल उत्पादन-क्षमता को वर्तमान बाजार मूल्य और विनिमय दर के आधार पर आंका जाता है।
अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग सामान्यतः इसी आधार पर की जाती है, क्योंकि यह देशों की अर्थव्यवस्था को एक समान मुद्रा (USD) में तुलना योग्य बनाती है।
भारत की तेज़ विकास दर और स्थिर आर्थिक वातावरण ने उसे इस मापदंड पर जापान से आगे निकलने में मदद की।
भारत की तेज़ आर्थिक वृद्धि के प्रमुख कारण
1. मजबूत घरेलू मांग
भारत की विशाल जनसंख्या और बढ़ती मध्यम वर्गीय आय ने घरेलू उपभोग को लगातार बढ़ाया है। उपभोक्ता वस्तुएँ, रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल और सेवाओं की मांग अर्थव्यवस्था को गति देती रही है।
2. इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा निवेश
सरकार द्वारा सड़क, रेलवे, बंदरगाह, एयरपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में बड़े पैमाने पर पूंजीगत निवेश किया गया।
इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़े, बल्कि औद्योगिक उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला भी मजबूत हुई।
3. सेवा क्षेत्र की वैश्विक ताकत
आईटी, सॉफ्टवेयर, फाइनेंशियल सर्विसेज, हेल्थ और एजुकेशन जैसे क्षेत्रों में भारत की वैश्विक उपस्थिति लगातार बढ़ी है।
सेवा क्षेत्र भारत के GDP में सबसे बड़ा योगदानकर्ता बना हुआ है और विदेशी मुद्रा अर्जन का भी प्रमुख स्रोत है।
4. डिजिटल और फिनटेक क्रांति
डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन बैंकिंग, UPI और ई-कॉमर्स ने भारतीय अर्थव्यवस्था को अधिक औपचारिक और पारदर्शी बनाया।
इससे टैक्स कलेक्शन में सुधार हुआ और आर्थिक गतिविधियों की गति तेज़ हुई।
5. जनसांख्यिकीय लाभ
भारत की युवा आबादी, कार्यशील आयु वर्ग की अधिकता और स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रमों ने उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
जापान को पीछे छोड़ने का महत्व
जापान लंबे समय से उच्च तकनीक, औद्योगिक दक्षता और स्थिर अर्थव्यवस्था के लिए जाना जाता रहा है।
भारत द्वारा जापान को पीछे छोड़ना यह दर्शाता है कि:
- भारत की विकास दर जापान से कहीं अधिक है
- भारत का घरेलू बाजार बड़ा और गतिशील है
- भविष्य की वैश्विक आर्थिक वृद्धि का केंद्र एशिया में भारत की ओर खिसक रहा है
यह उपलब्धि भारत को अंतरराष्ट्रीय निवेश और रणनीतिक साझेदारी के लिए और अधिक आकर्षक बनाती है।
क्या भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है?
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि:
- नीतिगत स्थिरता बनी रहती है
- इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग पर निवेश जारी रहता है
- शिक्षा और कौशल विकास को प्राथमिकता मिलती है
तो आने वाले वर्षों में भारत जर्मनी को पीछे छोड़कर तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
निष्कर्ष
भारत का जापान को पीछे छोड़कर विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना एक आर्थिक मील का पत्थर है। यह उपलब्धि भारत की विकास-यात्रा, नीति-सुधारों और जनशक्ति की क्षमता को दर्शाती है।
हालाँकि चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं, लेकिन वर्तमान रुझान यह संकेत देते हैं कि भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में आने वाले दशक में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
परीक्षा-उपयोगी प्रश्न-उत्तर (4 Q&A)
Q1. भारत हाल ही में विश्व की कौन-सी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना है?
उत्तर: भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना है।
Q2. भारत का वर्तमान नाममात्र GDP लगभग कितना है?
उत्तर: लगभग 4.18 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर।
Q3. भारत ने किस देश को पीछे छोड़कर यह स्थान हासिल किया है?
उत्तर: भारत ने जापान को पीछे छोड़ा है।
Q4. भारत की आर्थिक वृद्धि के दो प्रमुख कारण लिखिए।
उत्तर: मजबूत घरेलू मांग और इंफ्रास्ट्रक्चर व सेवा क्षेत्र का तेज़ विकास।