DAC ने ₹79,000 करोड़ की रक्षा खरीद को दी मंजूरी | Current Affairs Hindi

₹79,000 करोड़ की रक्षा खरीद को DAC की मंजूरी: भारतीय सेना की ताकत बढ़ाने वाला ऐतिहासिक निर्णय

भारत की सुरक्षा और सामरिक क्षमता को नई ऊँचाई देने के उद्देश्य से 29 दिसंबर 2025 को एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में हुई Defence Acquisition Council (DAC) की बैठक में लगभग ₹79,000 करोड़ के रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। यह फैसला भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना – तीनों के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।

यह निर्णय ऐसे समय पर आया है जब भारत को सीमाओं पर पारंपरिक और आधुनिक दोनों तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है – जैसे ड्रोन खतरा, लंबी दूरी से हमला करने की क्षमता, समुद्री निगरानी और हवाई श्रेष्ठता बनाए रखना।


Defence Acquisition Council (DAC) क्या है?

Defence Acquisition Council (DAC) रक्षा मंत्रालय का सर्वोच्च निर्णयकारी निकाय है, जो सेनाओं की पूंजीगत खरीद (Capital Acquisition) से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी देता है। इसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री करते हैं।

DAC द्वारा दी गई मंजूरी को Acceptance of Necessity (AoN) कहा जाता है।
AoN का अर्थ है कि सरकार ने यह मान लिया है कि संबंधित हथियार या प्रणाली सेना के लिए वास्तव में आवश्यक है और अब उसकी खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

👉 महत्वपूर्ण तथ्य (Highlight):

  • AoN खरीद प्रक्रिया का पहला और सबसे अहम चरण होता है
  • इसके बाद ही टेंडर, ट्रायल और कॉन्ट्रैक्ट की प्रक्रिया शुरू होती है

₹79,000 करोड़ की मंजूरी क्यों है खास?

यह केवल एक बड़ा वित्तीय आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह भारत की दीर्घकालिक रक्षा रणनीति को दर्शाता है।

इस निर्णय के पीछे मुख्य उद्देश्य हैं:

  • सीमाओं की सुरक्षा मजबूत करना
  • आधुनिक युद्ध तकनीक अपनाना
  • ड्रोन और मिसाइल खतरों से निपटना
  • आत्मनिर्भर भारत (Make in India) को बढ़ावा देना

यह पैकेज आने वाले वर्षों में भारतीय सेनाओं की फायरपावर, निगरानी क्षमता और सटीकता को कई गुना बढ़ा सकता है।


भारतीय थलसेना के लिए स्वीकृत प्रमुख प्रस्ताव

DAC ने भारतीय थलसेना के लिए कई अत्याधुनिक प्रणालियों को मंजूरी दी है।

1. Loiter Mission System (लॉइटर म्यूनिशन)

इसे आम भाषा में “कामिकाज़े ड्रोन” भी कहा जाता है।
ये ड्रोन किसी क्षेत्र में लंबे समय तक मंडराते रहते हैं और लक्ष्य मिलते ही उस पर सटीक हमला करते हैं।

फायदे:

  • दुश्मन के ठिकानों पर अचानक हमला
  • कम लागत में उच्च सटीकता
  • सीमावर्ती इलाकों में बेहद प्रभावी

2. Low Level Light Weight Radar

यह रडार कम ऊँचाई पर उड़ने वाले ड्रोन और UAV को पहचानने के लिए बनाया गया है।

क्यों जरूरी है?

  • आधुनिक युद्ध में छोटे ड्रोन बड़ा खतरा बन चुके हैं
  • पारंपरिक रडार कई बार इन्हें पकड़ नहीं पाते

3. Pinaka मल्टी बैरल रॉकेट सिस्टम के लिए Guided Rockets

Pinaka भारत का स्वदेशी Multi Barrel Rocket Launcher (MBRL) है।
अब इसके लिए Guided Rockets को मंजूरी दी गई है, जिससे इसकी मारक क्षमता और सटीकता कई गुना बढ़ जाएगी।

👉 Highlight Fact:
पहले Pinaka क्षेत्रीय हमला करता था, अब यह टारगेटेड स्ट्राइक करने में सक्षम होगा।


4. Integrated Drone Identification & Interception System MK-II

यह प्रणाली ड्रोन की पहचान, ट्रैकिंग और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए विकसित की गई है।

महत्व:

  • एयरबेस, सैन्य ठिकानों और संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा
  • बढ़ते ड्रोन हमलों से बचाव

भारतीय नौसेना के लिए स्वीकृत प्रस्ताव

1. High Altitude Long Endurance (HALE) RPAS

HALE RPAS ऐसे ड्रोन होते हैं जो:

  • बहुत अधिक ऊँचाई पर
  • कई घंटों/दिनों तक उड़ सकते हैं

इनका उपयोग समुद्री निगरानी के लिए किया जाएगा, खासकर हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में।


2. Bollard Pull (BP) Tugs

ये विशेष जहाज होते हैं जो:

  • बड़े युद्धपोतों
  • पनडुब्बियों

को बंदरगाहों में सुरक्षित तरीके से चलाने में मदद करते हैं।


3. HF Software Defined Radio (Manpack)

यह एक उन्नत संचार प्रणाली है, जिससे नौसेना को:

  • लंबी दूरी पर
  • सुरक्षित और भरोसेमंद संचार

की सुविधा मिलेगी।


भारतीय वायुसेना के लिए स्वीकृत प्रमुख सिस्टम

1. Astra MK-II Air-to-Air Missile

Astra MK-II भारत की अगली पीढ़ी की Beyond Visual Range (BVR) मिसाइल है।

मुख्य विशेषताएँ:

  • लंबी मारक दूरी
  • तेज गति
  • दुश्मन के फाइटर जेट्स को दूर से ही मार गिराने की क्षमता

👉 Highlight Fact:
यह मिसाइल भारत की वायु श्रेष्ठता को मजबूत करेगी।


2. SPICE-1000 Guidance Kit

यह एक Precision Guidance Kit है, जिससे सामान्य बम भी अत्यंत सटीक हथियार बन जाते हैं।

फायदा:

  • कम गोला-बारूद में अधिक प्रभाव
  • Collateral damage में कमी

3. Full Mission Simulator (LCA Tejas)

Tejas लड़ाकू विमान के पायलटों के लिए:

  • अत्याधुनिक प्रशिक्षण
  • वास्तविक युद्ध जैसी स्थिति में अभ्यास

की सुविधा मिलेगी।


आत्मनिर्भर भारत और Make in India पर प्रभाव

DAC के इन निर्णयों में स्वदेशी विकास और उत्पादन पर विशेष जोर दिया गया है।

इसके फायदे:

  • विदेशी निर्भरता में कमी
  • भारतीय रक्षा उद्योग को बढ़ावा
  • निजी कंपनियों और स्टार्ट-अप्स को अवसर
  • रोजगार सृजन

यह रक्षा क्षेत्र में भारत को आयातक से निर्माता बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।


संभावित चुनौतियाँ

हालाँकि यह निर्णय ऐतिहासिक है, लेकिन कुछ चुनौतियाँ भी सामने आ सकती हैं:

  • समय पर उत्पादन और आपूर्ति
  • नई तकनीकों का मौजूदा सिस्टम से समन्वय
  • लागत और बजट प्रबंधन

इन चुनौतियों से निपटना सरकार और रक्षा उद्योग की सामूहिक जिम्मेदारी होगी।


निष्कर्ष

₹79,000 करोड़ की रक्षा खरीद को DAC की मंजूरी भारत की सैन्य तैयारी, तकनीकी उन्नयन और आत्मनिर्भरता की स्पष्ट तस्वीर पेश करती है। यह फैसला न केवल वर्तमान सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में मदद करेगा, बल्कि आने वाले दशकों के लिए भारत को एक मजबूत रक्षा शक्ति के रूप में स्थापित करेगा।


परीक्षा उपयोगी 4 प्रश्न-उत्तर (Q&A)

Q1. Defence Acquisition Council (DAC) क्या है?

उत्तर: DAC रक्षा मंत्रालय का सर्वोच्च निकाय है जो सेनाओं की पूंजीगत रक्षा खरीद को मंजूरी देता है।

Q2. AoN (Acceptance of Necessity) का क्या अर्थ है?

उत्तर: AoN का मतलब है कि सरकार ने किसी रक्षा प्रणाली की आवश्यकता को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया है।

Q3. Astra MK-II मिसाइल किससे संबंधित है?

उत्तर: Astra MK-II एक स्वदेशी Beyond Visual Range एयर-टू-एयर मिसाइल है, जो वायुसेना के लिए है।

Q4. ₹79,000 करोड़ की मंजूरी का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर: भारतीय सेनाओं की आधुनिकता, सटीकता, निगरानी क्षमता बढ़ाना और आत्मनिर्भर भारत को मजबूत करना।

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